दूरियों से फर्क पड़ता नहीं…
दूरियों से फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती
दूरियों से फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती
तू दिल कि हालत क्या जाने
मेरी मोहब्बत क्या जाने
मेरी रुह की गह’राई में
बस तेरी पर’छाई है
जिंन्दगी के खालिपन की
एक तू ही भर’पाई है
तू यादों की खुश’बू बन’के
आज मुझ पे छाई है
सांसो की तरह मेरी ध’ड़्कनों
में तू समाई है
तुझे दूर कैसे रखूँ अप’ने से
ये तो प्यार कर’ने की सज़ा है
जो हम’ने आप’से पाई है !!
तुने चाहा है मुझे ये करम क्या कम है
तु प्यार कर’ती है मुझ’से ये भरम क्या कम है
एक दिन ये भरम टुटेगा मेरा
उफ़ किस्मत का ये सितम क्या कम है
यहाँ कौन रोता है किसी के लिए
सब अपनी ही किसी बात पर रोते है
इस दुनिया में मिलता है सच्चा साथी मुश्किल से
बाक़ी सब तो मतलब के यार होते है
हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है
ख्वाबों ने पलकों पे आना छोड़ दिया है
नही आती अब तो हिचकियाँ भी,
शायद आप ने भी याद करना छोड़ दिया