Sher-o-Shayari

World of Poetry

दूरियों से फर्क पड़ता नहीं…

December12

दूरियों से फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है

दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती

तू दिल कि हालत क्या जाने…

November19

तू दिल कि हालत क्या जाने
मेरी मोहब्बत क्या जाने

मेरी रुह की गह’राई में
बस तेरी पर’छाई है
जिंन्दगी के खालिपन की
एक तू ही भर’पाई है
तू यादों की खुश’बू बन’के
आज मुझ पे छाई है
सांसो की तरह मेरी ध’ड़्कनों
में तू समाई है
तुझे दूर कैसे रखूँ अप’ने से
ये तो प्यार कर’ने की सज़ा है
जो हम’ने आप’से पाई है !!

तुने चाहा है मुझे ये करम क्या कम है…

November19

तुने चाहा है मुझे ये करम क्या कम है
तु प्यार कर’ती है मुझ’से ये भरम क्या कम है
एक दिन ये भरम टुटेगा मेरा
उफ़ किस्मत का ये सितम क्या कम है

यहाँ कौन रोता है किसी के लिए…

November18

यहाँ कौन रोता है किसी के लिए
सब अपनी ही किसी बात पर रोते है

इस दुनिया में मिलता है सच्चा साथी मुश्किल से
बाक़ी सब तो मतलब के यार होते है

हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है…

November18

हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है
ख्वाबों ने पलकों पे आना छोड़ दिया है

नही आती अब तो हिचकियाँ भी,
शायद आप ने भी याद करना छोड़ दिया

« Older Entries