Sher-o-Shayari

World of Poetry

हमदर्दी का नाम न दे…

November12

हमदर्दी का नाम न दे
यह तो है मोहब्बत मेरी

अहसान का मुझे करार न दे
चाहा है तुझे दिल से

समझती हूँ में जज़्बात तेरे
मेरी बात भी तू समझ ज़रा
नाम उसका तू बार बार न ले
कही यह दिल उससे बेवफी न दे दे

वाडा किया है तो निभाना पड़ेगा
चाहे मेरी जान चली जाए
वादा किया है तो मुझे जाना ही पड़ेगा
इस मोहब्बत को तो आज़माना पड़ेगा

विशवाश है मुझे उन आँखो पे
चाहे यह मेरा धुन्ध विशवाश हो
देखा है उसने मोहब्बत से मुझे
देखी है नामी मैने उन आँखों में

उससे भूलना अब आसान न होगा
यह बंधन हो गया है पुराना
मुझे उन बाहों में जाना होगा
उस दिल में घर आपना बनाना होगा

शायद यह ज़िंदगी की भूल हो
मुझे यह ज़ोख़िम उठना होगा
लाए हम आपने घर कातिल को
देना है मंज़िल-ए-अंजाम इश्क़ को

तू आज मुझसे एक वादा कर दे
छोड़ना न मुझे तू कभी
तू मेरा हाथ आज थम ले
संभाल लेना गर ज़िंदगी मुझे धोखा दे

वो हवा का ज़ोखा छू के निकल गया…

November12

वो हवा का ज़ोखा छू के निकल गया
गुदगुदा के मेरे मंन को यूह सा निकल गया

छीन के मेरे सपनो को पानी वो दे गया
वो पियासा था जो दरया को रवानी दे गया

टकटकती है यह नज़र दस्तख़ पे
दिल पे दस्तख़ का है इंतज़ार
हवा के साथ आया था वो लूटेरा
लूट के मुझे चला गया

इस दिल मैं तू ही बस्ता है…

November11

इस दिल मैं तू ही बस्ता है
सदा रहेता है दिल के करीब

मुझे छोड़ के जाने वाले
तेरी यादो के सहारे जीना मेरा नसीब

तुझे याद नही आती यह भी सही…

November11

तुझे याद नही आती यह भी सही
पेर मेरी मोहब्बत में क्या कमी रही

तनहा बैठे तेरे खुवब देखा करती हूँ
बस तेरी यादों के सहारे हूँ जी रही

आज तेरी कहानी फिर याद आई…

November11

आज तेरी कहानी फिर याद आई
आज आपनी जवानी फिर याद आई

उठी थी तेरी डॉली और मेरा जनाज़ा
आज ज़िंदगी के ज़ुल्मो के रुसवाई याद आई

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