Chahat Teri Chupa Ke Jiye Ja Raha Hu Mai | Sher-o-Shayari

Chahat Teri Chupa Ke Jiye Ja Raha Hu Mai

By | Nov 15, 2013

चाहत तेरी छुपा के जिए जा रहा हूँ मैं,
खुद को हँसीं फरेब दिए जा रहा हूँ मैं!
तू बेवफा है फिर भी मेरा हौंसला तो देख,
तुझपे वफ़ा निसार किये जा रहा हूँ मैं !
भरके तेरे दामन में मुसर्रत की कहकशां,
सौगात आंसुओं की लिए जा रहा हूँ मैं !
रुसवा हो न जाये कही तू इस जहान में,
होठों को अपने खुद ही सिये जा रहा हूँ मैं !
मूरत तेरी तराश कर पुजूंगा इसलिए,
पत्थर तेरी गली का लिए जा रहा हूँ मैं

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