benaam sa ye dard thaher kyu nahi jata | Sher-o-Shayari

benaam sa ye dard thaher kyu nahi jata

By | Mar 18, 2014

बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नही जाता,
जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता,

सब कुछ तो है क्या ढूंढती हैं ये निगाहें,
क्या बात है मैं वक्त पे घर क्यों नहीं जाता,

वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहां मे,
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नही जाता,

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा,
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यों नहीं जाता,

वो नाम जो बरसो से ना चेहरा ना बदन है,
वो ख्वाब अगर है तो बिखर क्यों नहीं जाता

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