Ye jo jindagi ki kitab hai | Sher-o-Shayari

Ye jo jindagi ki kitab hai

By | Mar 18, 2014

ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या खिताब है,
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है, कही जान-लेवा अज़ाब है,

कहीं छांव है, कहीं धूप है, कहीं और ही कोई रूप है,
कई चेहरे हैं इसमे छिपे हुये, एक अजीब सा ये निकाब है,

कहीं खो दिया कहीं पा लिया, कहीं रो लिया कहीं गा लिया,
कहीं छीन लेती है हर खुशी, कहीं मेहरबान ला-ज़वाब है,

कहीं आंसू की है दास्तान, कहीं मुस्कुराहटों का है बयान,
कहीं बरकतों की हैं बारिशें, कहीं तिशनगी बेहिसाब है,

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