हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है…
November18
हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है
ख्वाबों ने पलकों पे आना छोड़ दिया है
नही आती अब तो हिचकियाँ भी,
शायद आप ने भी याद करना छोड़ दिया
हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है
ख्वाबों ने पलकों पे आना छोड़ दिया है
नही आती अब तो हिचकियाँ भी,
शायद आप ने भी याद करना छोड़ दिया
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