Teri Mojudgi ka Ehsaas Itna Gehra Hai Mere Andar | Sher-o-Shayari

Teri Mojudgi ka Ehsaas Itna Gehra Hai Mere Andar

By | Dec 14, 2013

धीरे धीरे तेरे लौट आने की उमीदों को झुठलाने लगा हूँ,
झूठी तसल्लियों से दिल को बहलाने लगा हूँ

रुखसत कर दिया ज़िन्दगी से तुझे मरा हुआ जान कर,
एक एक करके ख़त तेरे मैं जलाने लगा हूँ

तनहाइयों में अश्क बहा लेता हूँ तुझको याद करके मैं,
पर रुसवाई से बचने को महफ़िल में मुस्कुराने लगा हूँ

दिल से तेरी यादों का अक्स मिटाने में नाकामयाब रहा मैं,
झूठ कह रहा हूँ लोगों से कि मैं तुझे भुलाने लगा हूँ

तेरी मौजूदगी का एहसास इतना गहरा है मेरे अन्दर,
कि मैं तो अब आईने से भी नज़रें चुराने लगा हूँ

मैने भी आज़ाद किया तुझको आज हर रिश्ते से,
तू भी खुश रह और मैं भी सुकून से कब्र में जाने लगा हूँ

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